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रेफ्रिजरेटर के कंडेन्सर काँइल की एहमीयत

 दोस्तो,  जब भी हम कीसी भी मशीन की बात करते है तो हम उसका अपने नजरीए से परीक्षण करते करते यह नतीजे पे पहुचते है की, मशीन की हर एक चीज एक दूसरे से जुडी हुई होती है। और हर एक की कार्य पद्धती अलग होती है।  पर आखीर मे सभी चीजो की कार्यपद्धती तो एकत्रित करते हुए ही मशीन का कामकाज पार पडता है और हमे जो फॅसिलिटी चाहीए वह उपलब्ध होती है।  ऐसी ही एक उपलब्धी के बारेमे हम आज बात करेंगे।  जी हाँ दोस्तो।  आज हम बात करेंगे रेफ्रिजरेटर और इसका एक महत्वपूर्ण अंग ,जिसे हम कंडेन्सर काँइल कहते है।  दोस्तो, रेफ्रिजरेटर मे एक मुलभुत सिद्धांत होता है, हिट ट्रान्स्फर करना। यही बेसिक फाँर्मयुला कायम रखके यह मशीन काम करके हमे कुलिंग प्रदान करती है। जब हम फ्रिज चलाते है, उस वक्त हमे जो चिजे थंडी करनी होती है वे फ्रिज के अंदर के कुलिंग करने वाले कम्पार्टमेंट मे रख देते है। जहाँ पे उन चिंजो की हीट कुलिंग करने वाला क्षेत्र अँब्जाँर्ब करता है और हीट ट्रान्स्फर होने के कारण वह चिजे थंडी हो जाती है। और बहोत दीनो तक टिकने की क्षमता उनमे क्रमप्राप्त होती है।  इसी तराह से फ्रीज के ...

वाँशिंग मशीन मे कपडे धोने के टीप्स


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वाशिंग मशीन में कपड़े धोने के टिप्स

क्या आप जानती हैं कि कपड़ों की सही धुलाई के साथ साथ उन की क्वालिटी को भी कैसे बरकरार रखा जा सकता है? अगर नहीं तो परेशान न हों.



क्या आप जानती हैं कि कपड़ों की सही धुलाई के साथसाथ उन की क्वालिटी को भी कैसे बरकरार रखा जा सकता है? अगर नहीं तो परेशान न हों. हम आप को बता रहे हैं कि कपड़ों की सही धुलाई कैसे करें:
– कपड़ों को धोने से पहले उन्हें अलग अलग करें जैसे ज्यादा गंदे कपड़ों को अलग धोएं तो कम गंदे कपड़ों को अलग. इसी तरह ऊनी और सूती कपड़ों को भी अलग कर लें. कमीजों, पैंटों, नए सूती कुरतों आदि को अलग धोएं तो चादरों, तौलियों और नाइट सूटों को अलग से धोएं. सभी कपड़ों को एकसाथ मशीन में भर देना उचित नहीं है.
– मशीन में कपड़ों को डालने का भी एक तरीका होता है जैसेकि बड़े कपड़े सब से पहले फिर उन से छोटे और फिर उन से छोटे. कपड़ों की तह को खोल कर डालें. अगर कपड़ों को यों ही मशीन में भर देंगी तो वे आपस में उलझ जाएंगे और फिर जिस समय मशीन स्पंज करती है, तो उन के फटने और मशीन में एरर आ कर रुक जाने की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है.
– कोई भी नया कपड़ा डालने से पहले चैक कर लें कि उस का रंग तो नहीं निकल रहा, क्योंकि अगर रंग निकलने वाला कपड़ा हुआ तो मशीन में डाले गए सारे कपड़े खराब हो जाएंगे.
– डिटर्जैंट पाउडर या साबुन का इस्तेमाल कपड़ों के हिसाब से करें. ज्यादा डिटर्जैंट के इस्तेमाल से ऊनी और सिल्क के कपड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.
– हर मशीन की डिटर्जैंट लेने की अपनी क्षमता होती है, इसलिए अगर मशीन में 1 ढक्कन डिटर्जैंट डालने के लिए लिखा है, तो उतना ही डालें.
– कई मशीनों की बुकलेट में लिखा होता है कि नौर्मल डिटर्जैंट के साथ आधा ढक्कन मशीन का डिटर्जैंट भी डालें, जो अलग से खरीदना होता है. लेकिन कई बार महिलाएं सोचती हैं कि इसे खरीदने की क्या जरूरत है. मगर यह सोच ठीक नहीं है, क्योंकि उस डिटर्जैंट की वजह से ही तो कपड़े ज्यादा साफ होते हैं.
– डिटर्जैंट चुनते वक्त पहले यह तय कर लें कि पाउडर का इस्तेमाल करना है या लिक्विड डिटर्जैंट का. लिक्विड डिटर्जैंट अपेक्षाकृत ज्यादा महंगा होता है पर इस बात को भी ध्यान में रखें कि अगर आप कपड़े धोने के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल करती हैं तो पाउडर पानी में आसानी से नहीं घुलेगा. बेहद मुलायम कपड़ों को धोने के लिए लिक्विड डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें.
– डिटर्जैंट का इस्तेमाल करते समय फैब्रिक का भी ध्यान रखें. सिल्क या ऊनी कपड़ों की धुलाई के लिए मुलायम डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें. बच्चों के कपड़ों की धुलाई के लिए बेहद मुलायम डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें, क्योंकि बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है. सफेद कपड़ों की धुलाई के लिए ब्लीच फौर्मूला वाले डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें तो रंगीन कपड़ों की धुलाई के लिए ऐसे डिटर्जैंट का इस्तेमाल करें जिस से कि कपड़ों में चमक आ जाए.
– वाशिंग मशीन में कपड़े धोते वक्त सब से पहले डिटर्जैंट डालें और फिर कपड़े, क्योंकि कपड़ों के ऊपर डिटर्जैंट डालने से न सिर्फ कपड़ों में डिटर्जैंट के चिपके रहने की आशंका रहती है, बल्कि कपड़ों का रंग भी उड़ जाता है.
– कपड़ों को वाशिंग मशीन में डालने से पहले उन पर लगे दागधब्बों को हाथ से छुड़ा लें. दरअसल, वाशिंग मशीन में दाग लगे कपड़ों को सीधा डालने से निशान और गहरे हो जाते हैं.
– अगर मशीन सेमीऔटोमैटिक है तो कपड़े धुल जाने के बाद अलार्म बजेगा. तब आप को कपड़ों में पानी निकालने के लिए ड्रायर में कपड़े भरने होंगे. इस में 5-10 मिनट लगेंगे. उस के बाद कपड़े सूखने डाल दें.
– कपड़े धोने के बाद वाशिंग मशीन का डिटर्जैंट बौक्स भी साफ करना जरूरी है. उस में बचा वाशिंग पाउडर जरूर निकाल लें और अच्छी तरह साफ करें. यदि संभव हो, तो पूरे बौक्स को बाहर निकाल लें और किसी पुराने टूथब्रश से साफ कर लें.
– वाशिंग मशीन के अंदर का ड्रम भी साफ करती रहें ताकि मशीन साफ रहे. उस में कई सारे छोटेछोटे छिद्र होते हैं, जिन में कीटाणु जमा हो जाते हैं. बेहतर है हर महीने खाली मशीन चला दें. इस के लिए डिशवाशर टैबलेट और गरम पानी का इस्तेमाल कीया जाता है। 
आपको यह लेख कैसा लगा इस बातकी हमे जानकारी हमे जरूर दे। 
हमे काँटँक्ट करने के लिए आप कमेंट बाँक्स मे कमेन्ट कर सकते है। अगर आप वाँशींग मशीन की पावडर खरीदना चाहते है तो आपके लिए साथ मे लिंक दिया हुआ है उसपे क्लिक करके आप शाँपिंग कर सकते है। 
आपका आपना ब्लाँग
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